Friday, January 11, 2019

आरोपियों को बचाने के मामले में अल्फाबेट के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर के खिलाफ कोर्ट केस

गूगल कंपनी में यौन उत्पीड़न के आरोपियों को बचाने के मामले में अल्फाबेट के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर के खिलाफ कंपनी के दो शेयरधारकों ने कोर्ट केस कर दिया है। अल्फाबेट गूगल की पेरेंट कंपनी है।

याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि गूगल को भविष्य में इस तरह के मामलों को रोकने के लिए अपने तौर-तरीके बदलने चाहिए। उनका कहना है कि यौन उत्पीड़न के मामलों में अल्फाबेट के डायरेक्टर अपनी जिम्मेदारियां नहीं निभा पाए। उन्हें कंपनी को हुए नुकसान की भरपाई करनी चाहिए।

बोर्ड मीटिंग में यौन उत्पीड़न मामले पर चर्चा हुई थी: याचिकाकर्ता
अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने पिछले साल अक्टूबर में दावा किया था कि गूगल के एंड्रॉयड मोबाइल ऑपरेटिंग डिवीजन के हेड रहे एंडी रूबीन पर साल 2013 में यौन उत्पीड़न का आरोप लगा था। इसके बावजूद गूगल ने एंडी को बचाया और साल 2014 में एग्जिट प्लान के तहत उन्हें 9 करोड़ डॉलर (660 करोड़ रुपए) भी दिए। साल 2016 तक गूगल की सर्च यूनिट के हेड रहे अमित सिंघल पर भी यौन उत्पीड़न के आरोप लगे थे।

अल्फाबेट के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर के खिलाफ दायर एक याचिका में कंपनी की बोर्ड मीटिंग के मिनट्स का हवाला देते हुए कहा गया है कि एक बैठक में यौन उत्पीड़न के आरोपियों के बारे में चर्चा हुई थी।

याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि अल्फाबेट के बोर्ड में कम से कम 3 स्वतंत्र निदेशक रखे जाने चाहिए और प्रबंधन के फैसलों पर शेयरधारकों को नजर रखने का अधिकार मिलना चाहिए।

गूगल के सीईओ ने माफी मांगी थी
गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने पिछले साल कर्मचारियों से माफी भी मांगी थी। उन्होंने यौन उत्पीड़न के मामलों को हैंडल करने के कंपनी तौर-तरीकों पर अफसोस जताते हुए भविष्य में सुधार की बात कही थी।

गूगल के 20,000 कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया था
पिछले साल नवंबर में गूगल के करीब 20 हजार कर्मचारियों ने दुनियाभर में विरोध प्रदर्शन किया था। इनमें ज्यादातर महिलाएं शामिल थीं। इनकी मांग थी कि यौन उत्पीड़न के मामलों में पारदर्शी नीति बनाई जाए। मध्यस्थता की अनिवार्यता खत्म की जाए।

कर्मचारियों के विरोध के बाद गूगल ने नवंबर में ही पॉलिसी में बदलाव कर दिया। नए नियमों के मुताबिक कंपनी की मध्यस्थता जरूरी नहीं होगी बल्कि यह पीड़ित की इच्छा पर निर्भर करेगा। यानी पीड़ित कर्मचारी चाहें तो सीधे कोर्ट जा सकते हैं।

पंड्या-राहुल पर लग सकता है दो वनडे का प्रतिबंध
पंड्या के इस बयान के बाद बीसीसीआई के प्रशासकों की समिति (सीओए) ने कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इसके बाद हार्दिक ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी, लेकिन बोर्ड दोनों पर दो वनडे का प्रतिबंध लगाने का सोच रहा है।

कोहली ने कहा, "भारतीय क्रिकेट टीम के नजरिए से देखें तो ड्रेसिंग रूम के माहौल में इस विवाद के कारण कोई बदलाव नहीं आया है। इससे हमारी खेल भावनाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा। टीम कॉम्बिनेशन को लेकर फैसले के बाद ही निर्णय लिया जाएगा। जरुरत होने पर हार्दिक की जगह रविंद्र जडेजा को टीम में लिया जा सकता है।"

विवाद के बाद हार्दिक ने माफी मांगते हुए कहा था, "मैं एक चैट शो पर गया था। मैंने कुछ टिप्पणियां कीं और इस दौरान मैंने इस बात का ध्यान नहीं दिया कि इससे किसी की भावनाएं आहत हो सकती हैं। मैं तहेदिल से इसके लिए माफी मांगता हूं।"

हार्दिक ने आगे कहा था, "मैं आपको भरोसा दिलाना चाहता हूं कि यह मैंने दुर्भावना के चलते या समाज के किसी खास वर्ग को बुरा दिखाने के लिए नहीं किया है। ईमानदारी से, मैं शो के नेचर के मुताबिक उसमें ज्यादा खो गया। मेरा मतलब किसी भावनाओं का अपमान करना या उन्हें आहत करना नहीं था।"

वहीं, अस्थाना ने 24 अगस्त को सीवीसी को पत्र लिखकर डायरेक्टर पर सना से दो करोड़ रुपए लेने का आरोप लगाया था। कुरैशी को ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग को आरोपों में पिछले साल अगस्त में गिरफ्तार किया था। सीबीआई भी उसके खिलाफ जांच कर रही है।

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